Thursday, April 28, 2011

prakriti se prakriti ki ore

प्रकृति शब्द आते ही हमारे दिमाग में हरे भरे पेड़ पौधे तरह तरह के पशु पछी, रंग बिरंगे फूल फल, पहाड़ 
सूरज ,चाँद, सितारे  सामने आ जाते  है
प्रकृति हमें रहने खाने के लिए सब कुछ मुहयिया कराती है अनुकूल  वातावरण दिलाती है |

पर हमने धीरे धीरे इसका शोषण करना शुरू कर दिया    हमने इसका हद  से ज्यादा इस्तमाल करना शुरू 
किया परिणाम ये कि आये दिन बाढ़ ,सुखा, सुनामी जैसी भयानक आपदाओं का सामना हमें करना पेड़ रहा 
है .|और ये हो भी क्यों  नही हमने अपनी हद पार कर दी हमारी अभिलाषा  अनंत है समाप्त नहीं होती
हम पेड़ो को काटते जा रहे है और लगा नही रहे है  हम उरिया रासायनिक खाद  कि खेती करके खेत को ख़राब करके अंपने ही लिए जहर पैदा कर रहे है प्राकर्तिक  खेती कि ओर हम ध्यान नही देते जो  हमारे बाबा  पर बाबा ने कि थी   ओर उससे पैदावार बहुत होती थी  खेर ये अलग बात है इस विषय पैर आपको  और भी जानकारी हम देंगे ये है link isko dekhyia kisan bhai ke liye http://www.youtube.com/watch?v=lA0oIMPAL98&feature=related

हम इसी कड़ी में प्राकृतिक वस्तुए जैसे  (पटसन)जूट के बैग , जुटे के स्कूल बैग , जूट के चप्पल , जूट के जूते,और भी कई प्राकृतिक वस्तुए  बना रहे है | 

 सबसे खास बात ये है कि ये प्रकृति यानि जुट(पटसन)  से बनी और प्रयोग के बाद  प्रकृति में ही समाप्त  हो जाती है इससे प्रदूषण नहीं फैलता और प्लास्टिक की तरह नहीं की समाप्त नहीं होता है 

ये कंपनी  प्रकृति नाम से है  और हमारा  स्लोगन है  प्रकृति से प्रकृति की ओर
यानि प्रकृति से हमने  जो वस्तु  लिया उसे  प्रयोग करके धरती में ही खाद के रूप में वापस कर दिया|
प्रोदुक्ट्स आपको साईट पर  दिए गये है | 

और हम आपको  प्रकृति के बारे और जानकारी भी देते रहंगे  
 धन्य वाद 
प्रकृति से प्रकृति की ओर